.लाॅकडाउन के बाद भी वायरस से लड़ने के लिए रहना होगा तैयार

आनन्द बिंदल की कलम से..

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कोरोना वायरस ने आज पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले रखा है। विश्व के ज्यादातर देशों में लाॅक डाउन चल रहा है जिससे कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के संपर्क में ना आए तथा प्रथक रहकर कोरोना वायरस के संक्रमण से बचा रहे और कोरोना वायरस ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ना लें पाये। कोरोनावायरस नया वायरस है जिसके बारे में विश्व भर के डाॅक्टर एवं शोधकर्ता इस वायरस के व्यवहार तथा अन्य जानकारी प्राप्त करने में लगे हैं तथा इसके लिए उपयुक्त वैक्सीन, दवाई, इलाज आदि की खोज करने में लगे हैं। किसी भी वायरस की सुरक्षित वैक्सीन/दवाई की खोज करने में काफी समय लगता है। लेकिन हम इतने समय तक लाॅक डाउन में नहीं रह सकते। लाॅक डाउन में वायरस का फैलाव रुक सकता है लेकिन इसका अस्तित्व खत्म नहीं होता। लाॅक डाउन के समय में हम सुरक्षित रहते हुए भविष्य के लिए (जब तक इसकी वैक्सीन या दवाई उपलब्ध नहीं होती है) इससे मुकाबला करने की रणनीति तैयार करते हैं। जैसे -वायरस के उपचार के लिए जरूरी विशिष्ट एवं पर्याप्त मेडिकल सुविधाओं की व्यवस्था करना। वायरस से संक्रमण की संभावना को कम करने के लिए जरूरी व्यवहार में अपनाये जाने वाले उपयुक्त व्यक्तिगत व्यवहार/अनुशासन की जानकारी प्राप्त करना तथा उसको अभ्यास में लाना जैसे सामाजिक, विभिन्न स्थानों एवं वस्तुओं का सैनिटाइजेशन, फेस मास्क एवं हेंड ग्लव्स का प्रयोग करना इत्यादि। हमें इन सारे व्यवहार/कार्यों का लाॅक डाउन के बाद भी पालन करना होगा। लाॅक डाउन अवधि एवं सामान्य समय में भी हमें अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना चाहिए जिससे लाॅक डाउन के बाद अगर हम वायरस से संक्रमित होते भी हैं तो वायरस हमें बहुत ज्यादा नुकसान ना पहुंचा पाए तथा हमें सघन एवं विशिष्ट चिकित्सा सुविधाओं की, जो कि सीमित रूप से उपलब्ध होती है, की जरूरत ना पड़े। जिससे यह मेडिकल सुविधाएं अन्य कम प्रतिरोधक क्षमता वाले संक्रमित लोग जैसे वृद्ध या पहले से ही बीमार लोगों के काम आ सके। प्रतिरोधक क्षमता हम परंपरागत तरीकों जैसे विटामिन सी खाद्य पदार्थों का सेवन, व्यायाम आदि या एलोपैथिक दवाइयों से भी बढ़ा सकते हैं। ध्यान रहे लाॅक डाउन केवल लाॅक डाउन अवधि में वायरस से संक्रमित होने से बचने का उपाय हैं ना कि वायरस को खत्म करने का। हमें निश्चित ही कुछ समय के बाद लाॅक डाउन से बाहर निकलना होगा और इस वायरस का मुकाबला करना होगा क्योंकि बहुत लंबे समय के लिए लाॅक डाउन की हमें बहुत ज्यादा आर्थिक कीमत चुकानी होगी जो कि कहीं ना कहीं इस वायरस के सामने हमारी हार होगी। जब तक इस वायरस का मेडिकल उपचार उपलब्ध नहीं होता है, हम उपयुक्त सभी व्यवस्थाएं जैसे व्यक्तिगत व्यवहार तथा अनुशासन, पर्याप्त व्यक्तिगत प्रतिरोधक क्षमता तथा पर्याप्त एवं विशिष्ट मेडिकल सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने से इस वायरस को हरा सकते हैं। कोरोना वायरस के इस संक्रमण की स्थिति में सरकार एवं मेडिकल विशेषज्ञों द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करने से ही हम स्वयं सुरक्षित रहेंगे एवं समाज भी सुरक्षित रहेगा और हम निश्चित रूप से कुछ समय के बाद इस वायरस के खिलाफ जीत हासिल करेंगें।
आनन्द बिन्दल (लेखक क्षेत्र के वरिष्ठ समाजसेवी एवं बिंदल हुडई रूद्रपुर के स्वामी है)

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