स्वतंत्रता दिवस पर रिहा हो सकते हैं उम्र दराज दस कैदी

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सितारगंज। सेंट्रल जेल, खुली जेल के दस कैदियों की अधिक उम्र उनकी आजादी का रास्ता बन सकती है। स्वतंत्रता दिवस पर ये कैदी रिहा सकते है। जेल प्रशासन की सूची में इन्हें प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है। हालांकि जेल प्रशासन ने वैसे तो 14 साल की सजा काट चुके 74 कैदियों को आजादी के पर्व पर रिहा करने की संस्तुति शासन को भेजी है। हत्या के मामले में सेंट्रल जेल, खुली जेल में आजीवन कारावास काट रहे दस कैदी आजादी के पर्व पर खुले आसमान में सांस ले सकते है। इनमें छह खुली जेल व चार सेंट्रल जेल के कैदी है। जेल से भेजी गई 74 कैदियों की सूची में इन्हें प्राथमिकता में रखा गया है। इसकी वजह इनकी अधिक उम्र और बीमारी को माना गया है। जिस कारण 14 साल से कम सजा काटने के बाद भी उम्र दराज, बीमार कैदियों को रिहा किया जा सकता है। वैसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में 14 साल की सजा काट चुका उम्रकैदी आजादी का हकदार होता है। लेकिन संविधान पीठ के मुताबिक अगर किसी कैदी की उम्र अधिक है और वह गंभीर रूप से बीमार है। उसने कम सजा भोगी है। इस तरह के कैदी को विचार विमर्श के बाद रिहा किया जा सकता है। इसलिए 74 कैदियों में दस कैदियों की आजादी के रास्ते 15 अगस्त को खुल सकते है। हालांकि इस वक्त केंद्रीय कारागार व खुली जेल में लगभग 650 कैदी सजा भोग रहे है। जिनमें अंडरवर्ल्ड डॉन पीपी भी शामिल है। जो सेंट्रल जेल के बैरक में सजा काट रहा है। माओवादी मकोका में नामजद एक अपराधी को हाल ही में मुंबई जेल शिफ्रट किया था।

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