वृहद रूप लेता ‘करवा चौथ व्रत’

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करवा चौथ एक ऐसा उपवास है जो लाखों लोगों को व्यवसाय देता है जिसमें करोड़ों रूपयों का व्यवसाय होता है। तीज त्यौहार हमारे जीवन में ढेर सारी उमंग व खुशियां लेकर आते हैं। अब तो त्यौहार विशेष धर्म, क्षेत्र सम्प्रदाय से आगे बढ़कर शौक, फैशन और खुशी के लिए मनाये जाने लगे हैं। नवरात्र में डांडिया, दुर्गापूजा, रामलीला, दशहरा और फिर आठ दिन बाद विशेषकर उत्तर भारत में मनाया जाने वाला सुहागिनों का पर्व करवा चौथ भी भारत के साथ विश्व के कोने कोने में अपने जीवन साथी की दीर्घायु की कामना के लिए हिन्दुओं में काफी लोकप्रिय पर्व बन गया है। इस दिन सभी स्त्रियां सोलह श्रृंगार कर आस्था के साथ अपनी मांग के सिंदूर बिंदियां गर्व से धारण कर ईश्वर से आजीवन सुहागिन होने का वरदान मांगती हैं। करवा चौथ व्रत स्त्रियों की दृढ़ निश्चयता और ति के प्रति प्यार व समर्पण को दर्शाता है। कार्तिक मास की चतुर्थी के दिन महिलाएं निर्जला उपवास रख और रात को चन्द्रमा को अर्ध्य देकर विशेष पूजा कर व्रत खोलती हैं। इस दिन विशेषकर पंजाबी महिलाए जिसमें सास अपनी बहू को सरगी जिसमें श्रृंगार का सामान, फल, मेवा, फनियां जो भोर के समय ग्रहण की जाती है और दिन में विशेष थाली परिक्रमा पूजा के बाद बहू अपनी सासू मां को पोईया जिसमें कपड़े, शाल, मेवा उपहार देकर कृतज्ञता व सम्मान व्यक्त करती हैं कि उनका प्यारा सा पिया सासू मां की वजह से मिला है। और संध्या को चमकती दमकती सुहागिनों को मानों चंदा भी दीदार करने चुपके चुपके से निकल पड़ता है और छन्नी से चंदा फिर अपने सजना का दीदार कर अर्ध्य देकर स्वयं जल ग्रहण कर व्रत खोलती हैं। अब स्त्रियां कामकाजी होने के कारण भारत में ही नहीं विदेशों में भी अपनी कुशलता का लोहा मनवाने लगी हैं। परन्तु अपनी परम्पराओं, रीति रिवाज को मनाना नहीं भूलतीं। इसीलिए वक्त, आधुनिकीकरण, ग्लोबलाइजेशन के कारण राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय बाजारों, कम्पनियों पर इस व्रत का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से गहरा असर पड़ने लगा है। अब अविवाहित युवतियां, युवक पति भी अपने जीवन साथी के प्रति प्यार व समर्पण दर्शाने के लिए यह व्रत रखने लगे हैं। अब यह त्यौहार घर के साथ साथ वृहद रूप से सामूहिक रूप से मनाया जाने लगा है। कई दिन पहले से बाजार (ऑनलाइन भी) अपने ग्राहकों को विभिन्न ऑफर व छूट देकर लुभाने लगे हैं। चारों ओर रौनक, खरीददारी की धूम मचने लगती है। सौंदर्य प्रसाधानों के ब्राण्ड बाजारों में विशेष रूप से नये उत्पाद, ब्यूटी पार्लर विशेषज्ञाएं ैकेज, छूट द्वारा महिलाओं व युवतियों को आकर्षित करते हैं। परिधान, साड़ी, सूट, लहंगा यहां तक कि पूजा की थाली, लोटा, छन्नी भी विशेष्ज्ञ आर्डर देकर बनवाये जाते हैं। चूड़ी, मेंहदी की दुकानों में तो नम्बर ही बड़ी मुश्किल से आता है। (सौ रूपए से हजारों रूपए तक की चूड़ियां मिलती हैं), मेंहदी वालों की तो चांदी हो जाती है। चांदी से याद आया, आभूषण, सुनारों की दुकानों में पायल, बिछुए के साथ सोने के आभूषण भी खूब खरीदे जाते हैं और कृत्रिम आभूषण, प्रसाधनों की तो गिनती ही नहीं। अपनी जीवन संगिनी को उपहार देने के लिए पति मोबाइल, घड़ी, आभूषण आदि की खरीददारी करते हैं। मेलों, उत्सवों, प्रदर्शनियों, प्रतियोगिताओं में भी बस खरीददारी और फूल, मिठाई, मेवा, करवे, दिये, पूजा सामग्री और तो और अब घर में पकवान के बदले रात्रि भोज के लिए होटल, रेस्टोरेंट भी फुल नजर आते हैं। इस तरह व्यवसायिक दृष्टि से ऊपर श्रद्धा, आस्था, दृढ़निश्चयता का यह अनूठा पर्व अब वृहद रूप ले चुका है। यह वैवाहिक रिश्ते की रेशम सी डोर को और मजबूत व तरोताजा कर जाता है और अपने साथ ढेर सारी खुशियां उमंग व यादें लेकर आता है जो अनमोल है। सभी को करवा चौथ पर्व की शुभकामनाएं।

डॉ- रचना अरोरा, रूद्रपुर।

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